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mahabharat 12.138.76: चूहे की तर्कपूर्ण, सुसंगत और अर्थपूर्ण बातें सुनकर लोमशजी ने प्रसन्नतापूर्वक उसकी ओर देखा और उसका स्वागत करके उसकी भूरि-भूरि प्रशंसा की। 76.   |   mahabharat अध्याय 12.138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान  »  श्लोक 76
 
 
श्लोक  12.138.76 
तद्वच: संगतं श्रुत्वा लोमशो युक्तमर्थवत्।
हर्षादुद्वीक्ष्य पलितं स्वागतेनाभ्यपूजयत्॥ ७६॥
 
 
अनुवाद
चूहे की तर्कपूर्ण, सुसंगत और अर्थपूर्ण बातें सुनकर लोमशजी ने प्रसन्नतापूर्वक उसकी ओर देखा और उसका स्वागत करके उसकी भूरि-भूरि प्रशंसा की। 76.
 
Hearing the mouse's logical, coherent and meaningful words, Lomash looked at him with joy and welcomed him and praised him profusely. 76.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)