श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान  »  श्लोक 75
 
 
श्लोक  12.138.75 
उलूकाच्चैव मां रक्ष क्षुद्र: प्रार्थयते हि माम्।
अहं छेत्स्यामि ते पाशान् सखे सत्येन ते शपे॥ ७५॥
 
 
अनुवाद
यहाँ यह नीच उल्लू भी मेरे प्राणों के पीछे पड़ा है। कृपया मुझे इससे भी बचाइए। मित्र! मैं सत्य की शपथ लेकर कहता हूँ कि मैं आपके बन्धन तोड़ दूँगा।॥ 75॥
 
'Here this lowly owl is also the one who is after my life. Please save me from this too. Friend! I swear to you in the name of truth that I will break your bonds.'॥ 75॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)