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mahabharat 12.138.74: भाई! मुझे इस नेवले से बहुत डर लग रहा है। इसलिए मैं तुम्हारे पीछे-पीछे इस जाल में फँस जाऊँगा; लेकिन दादा! मुझे मत मारो, मुझे बचा लो; क्योंकि मैं जीवित रहूँगा, तभी तुम्हारी रक्षा कर सकूँगा।'   |   mahabharat अध्याय 12.138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान  »  श्लोक 74
 
 
श्लोक  12.138.74 
अहं त्वानुप्रवेक्ष्यामि नकुलान्मे महद् भयम्।
त्रायस्व भो मा वधीस्त्वं शक्तोऽस्मि तव रक्षणे॥ ७४॥
 
 
अनुवाद
भाई! मुझे इस नेवले से बहुत डर लग रहा है। इसलिए मैं तुम्हारे पीछे-पीछे इस जाल में फँस जाऊँगा; लेकिन दादा! मुझे मत मारो, मुझे बचा लो; क्योंकि मैं जीवित रहूँगा, तभी तुम्हारी रक्षा कर सकूँगा।'
 
‘Brother! I am very scared of this mongoose. That is why I will follow you into this trap; but Dada! Please do not kill me, please save me; because only if I am alive, I am capable of protecting you.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)