श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान  »  श्लोक 73
 
 
श्लोक  12.138.73 
उदारं यद् भवानाह नैतच्चित्रं भवद्विधे।
विहितो यस्तु मार्गो मे हितार्थं शृणु तं मम॥ ७३॥
 
 
अनुवाद
भाई बिल्लव! आपने जो उदार वचन कहे हैं, वे आप जैसे बुद्धिमान व्यक्ति के लिए आश्चर्यजनक नहीं हैं। आप दोनों के हित के लिए मैंने जो निर्णय लिया है, उसे सुनिए।
 
'Brother Billav! The generous words you have spoken are not surprising for a wise man like you. Listen to me what I have decided for the benefit of both of you.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)