श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान  »  श्लोक 72
 
 
श्लोक  12.138.72 
इत्येवमुक्त: पलितो मार्जारं वशमागतम्।
वाक्यं हितमुवाचेदमभिनीतार्थमर्थवित्॥ ७२॥
 
 
अनुवाद
जब बिल्ली ने ऐसा कहा, तब पलीत ने उसका अभिप्राय समझकर अपने वश में आई हुई बिल्ली से निम्नलिखित अर्थपूर्ण एवं हितकर बात कही - ॥ 72॥
 
When the cat said this, Palita, understanding his purpose, said the following meaningful and beneficial thing to the cat that had come under his control - ॥ 72॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)