Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.138.71: इस समय मेरा अभिमान चूर हो गया है। मैं आपका भक्त और शिष्य बन गया हूँ। मैं आपके कल्याण के लिए कार्य करूँगा और सदैव आपकी आज्ञा में रहूँगा। मैं सब प्रकार से आपकी शरण में आया हूँ।॥71॥ | mahabharat अध्याय 12.138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न्यस्तमानोऽस्मि भक्तोऽस्मि शिष्यस्त्वद्धितकृत् तथा।
निदेशवशवर्ती च भवन्तं शरणं गत:॥ ७१॥
अनुवाद
इस समय मेरा अभिमान चूर हो गया है। मैं आपका भक्त और शिष्य बन गया हूँ। मैं आपके कल्याण के लिए कार्य करूँगा और सदैव आपकी आज्ञा में रहूँगा। मैं सब प्रकार से आपकी शरण में आया हूँ।॥71॥
‘At this time my pride has been shattered. I have become your devotee and disciple. I will work for your welfare and will always remain under your command. I have come under your protection in every way.’॥ 71॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥