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mahabharat 12.138.7: राजा अपने मित्रों और शत्रुओं को किस प्रकार वश में रखता है, तथा मित्र और शत्रुओं के बीच रहते हुए उसे क्या प्रयत्न करने चाहिए? ॥7॥   |   mahabharat अध्याय 12.138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.138.7 
कथं मित्रमरिं चापि विन्दते भरतर्षभ।
चेष्टितव्यं कथं चात्र शत्रोर्मित्रस्य चान्तरे॥ ७॥
 
 
अनुवाद
राजा अपने मित्रों और शत्रुओं को किस प्रकार वश में रखता है, तथा मित्र और शत्रुओं के बीच रहते हुए उसे क्या प्रयत्न करने चाहिए? ॥7॥
 
How does a king subjugate his friends and enemies, and what efforts should he make while being between friends and enemies? ॥ 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)