श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान  »  श्लोक 69
 
 
श्लोक  12.138.69 
अहं हि भृशमापन्नस्त्वमापन्नतरो मम।
द्वयोरापन्नयो: संधि: क्रियतां मा चिराय च॥ ६९॥
 
 
अनुवाद
मैं महान विपत्ति में फँसा हुआ हूँ और तुम भी महान संकट में हो। ऐसे संकट में पड़कर हम दोनों को संधि कर लेनी चाहिए। इसमें विलम्ब नहीं करना चाहिए॥69॥
 
'I am trapped in a great calamity and you too are in a great trouble. Being in such a trouble, both of us should make peace. There should be no delay in this.॥ 69॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)