श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान  »  श्लोक 68
 
 
श्लोक  12.138.68 
नन्दामि सौम्य भद्रं ते यो मां जीवितुमिच्छसि।
श्रेयश्च यदि जानीषे क्रियतां मा विचारय॥ ६८॥
 
 
अनुवाद
सौम्य! मैं तुम्हें नमस्कार करता हूँ। तुम्हारा कल्याण हो कि तुम मुझे जीवन देना चाहते हो। यदि तुम हमारे कल्याण का उपाय जानते हो, तो उसे करो। अन्य किसी बात का विचार मत करो। 68।
 
'Soumya! I greet you. May you be blessed that you want to give me life. If you know the means for our welfare, then do it. Do not think of any other thing. 68.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)