श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान  »  श्लोक 66
 
 
श्लोक  12.138.66 
बुद्धिमान् वाक्यसम्पन्नस्तद्वाक्यमनुवर्णयन्।
स्वामवस्थां समीक्ष्याथ साम्नैव प्रत्यपूजयत् ॥ ६६॥
 
 
अनुवाद
वह बहुत बुद्धिमान था। बोलने की कला में निपुण था। पहले उसने चूहे की बातें मन ही मन दोहराईं; फिर अपनी हालत देखकर उसने विनम्रता से चूहे की भूरि-भूरि प्रशंसा की।
 
He had a good intellect. He was skilled in the art of speaking. First he repeated the mouse's words to himself; then looking at his own condition he praised the mouse profusely in a polite manner.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)