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mahabharat 12.138.65: अपने शत्रु की यह तर्कपूर्ण और स्वीकार्य बात सुनकर बुद्धिमान बिल्ली कुछ कहने को तैयार हुई।   |   mahabharat अध्याय 12.138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.138.65 
अथ सुव्याहृतं श्रुत्वा तस्य शत्रोर्विचक्षण:।
हेतुमद् ग्रहणीयार्थं मार्जारो वाक्यमब्रवीत् ॥ ६५॥
 
 
अनुवाद
अपने शत्रु की यह तर्कपूर्ण और स्वीकार्य बात सुनकर बुद्धिमान बिल्ली कुछ कहने को तैयार हुई।
 
Having heard this logical and acceptable speech of his enemy, the intelligent cat prepared to say something. 65.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)