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श्री महाभारत
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पर्व 12: शान्ति पर्व
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अध्याय 138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान
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श्लोक 63
श्लोक
12.138.63
ईदृशो नौ समायोगो भविष्यति सुविस्तर:।
अहं त्वां तारयिष्यामि मां च त्वं तारयिष्यसि॥ ६३॥
अनुवाद
इस प्रकार हमारा यह मिलन चिरस्थायी होगा। मैं विपत्ति से तुम्हारा उद्धार करूँगा और तुम मुझे संकट से बचाओगे॥ 63॥
‘In this way, this union of ours will be everlasting. I will help you overcome adversity and you will save me from trouble.’॥ 63॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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