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mahabharat 12.138.62: ‘जब कोई मनुष्य लाठी के सहारे गहरी और बड़ी नदी पार करता है, तब वह लाठी को किनारे पर रख देता है और वह लाठी भी उसे नदी पार करने में सहायता करती है ॥ 62॥   |   mahabharat अध्याय 12.138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.138.62 
कश्चित् तरति काष्ठेन सुगम्भीरां महानदीम्।
स तारयति तत् काष्ठं स च काष्ठेन तार्यते॥ ६२॥
 
 
अनुवाद
‘जब कोई मनुष्य लाठी के सहारे गहरी और बड़ी नदी पार करता है, तब वह लाठी को किनारे पर रख देता है और वह लाठी भी उसे नदी पार करने में सहायता करती है ॥ 62॥
 
‘When a man crosses a deep and large river with the help of a stick, he puts the stick on the bank and that stick also helps him in crossing the river.॥ 62॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)