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mahabharat 12.138.60: अतः हम दोनों में प्रेम सदैव बढ़ता रहे और हमारा मेल-जोल प्रतिदिन बना रहे। जब किसी कार्य का समय समाप्त हो जाता है, तब विद्वान पुरुष उसकी प्रशंसा नहीं करते।   |   mahabharat अध्याय 12.138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान  »  श्लोक 60
 
 
श्लोक  12.138.60 
तस्माद् विवर्धतां प्रीतिर्नित्यं संगतमस्तु नौ।
कालातीतमिहार्थं तु न प्रशंसन्ति पण्डिता:॥ ६०॥
 
 
अनुवाद
अतः हम दोनों में प्रेम सदैव बढ़ता रहे और हमारा मेल-जोल प्रतिदिन बना रहे। जब किसी कार्य का समय समाप्त हो जाता है, तब विद्वान पुरुष उसकी प्रशंसा नहीं करते।
 
‘Therefore, let love always increase between us and let our association remain constant every day. When the time of a task is over, the learned men do not praise it. 60.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)