श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  12.138.6 
सर्वत्र प्रार्थ्यमानेन दुर्बलेन महाबलै:।
एकेनैवासहायेन शक्यं स्थातुं भवेत् कथम्॥ ६॥
 
 
अनुवाद
जब अनेक शक्तिशाली शत्रु सब ओर से दुर्बल राजा को पकड़ने के लिए तैयार हों, तब वह असहाय राजा उस स्थिति का सामना कैसे कर सकता है?॥6॥
 
When several powerful enemies are ready to seize a weak king from all sides, then how can that helpless king face that situation?॥ 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)