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mahabharat 12.138.59: धैर्यवान पुरुष उन लोगों की भी प्रशंसा नहीं करते जो किसी पर विश्वास नहीं करते और जो किसी पर भी विश्वास नहीं करते; क्योंकि उनका मन सदैव चिंता से भरा रहता है॥ 59॥   |   mahabharat अध्याय 12.138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान  »  श्लोक 59
 
 
श्लोक  12.138.59 
यस्मिन्नाश्वासते कश्चिद् यश्च नाश्वसिति क्वचित्।
न तौ धीरा: प्रशंसन्ति नित्यमुद्विग्नमानसौ॥ ५९॥
 
 
अनुवाद
धैर्यवान पुरुष उन लोगों की भी प्रशंसा नहीं करते जो किसी पर विश्वास नहीं करते और जो किसी पर भी विश्वास नहीं करते; क्योंकि उनका मन सदैव चिंता से भरा रहता है॥ 59॥
 
'The patient men do not praise those who do not trust anyone and those who do not trust anyone else either; because their minds are always filled with anxiety.॥ 59॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)