श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान  »  श्लोक 56
 
 
श्लोक  12.138.56 
सतां साप्तपदं मैत्रं स सखा मेऽसि पण्डित:।
सांवास्यकं करिष्यामि नास्ति ते भयमद्य वै॥ ५६॥
 
 
अनुवाद
सात कदम साथ-साथ चलने से ही मुनियों में मित्रता स्थापित हो जाती है। तुम और मैं यहाँ सदा साथ-साथ रहते आए हो; अतः तुम मेरे विद्वान् मित्र हो। मैं इतने दिन तुम्हारे साथ रहकर अपना मित्र-धर्म अवश्य पूरा करूँगा, अतः अब तुम्हें कोई भय न हो॥ 56॥
 
‘Friendship is established between saints by walking together for just seven steps. You and I have always lived together here; therefore, you are my learned friend. I will certainly fulfil my duty as a friend by staying with you for so many days, therefore, you have no fear now.॥ 56॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)