श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान  »  श्लोक 55
 
 
श्लोक  12.138.55 
कूजंश्चपलनेत्रोऽयं कौशिको मां निरीक्षते।
नगशाखाग्रग: पापस्तस्याहं भृशमुद्विजे॥ ५५॥
 
 
अनुवाद
यह पापी उल्लू वृक्ष की शाखा पर बैठा हुआ, बेचैन आँखों वाला, 'हू हू' जैसी आवाज करता हुआ मेरी ओर घूर रहा है। मैं उससे बहुत डरता हूँ॥ 55॥
 
‘This sinful owl with restless eyes is sitting on the branch of the tree and staring at me while making sounds like ‘hoo hoo’. I am very scared of him.॥ 55॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)