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mahabharat 12.138.54: मार्जर! देखो, ये नेवला और उल्लू दोनों ही पापपूर्ण इरादे से यहाँ ठहरे हुए हैं। वे मेरी घात में बैठे हैं। जब तक वे मुझ पर आक्रमण नहीं करते, मैं ठीक हूँ।' 54.   |   mahabharat अध्याय 12.138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.138.54 
इदं हि नकुलोलूकं पापबुद्धॺाभिसंस्थितम्।
न धर्षयति मार्जार तेन मे स्वस्ति साम्प्रतम्॥ ५४॥
 
 
अनुवाद
मार्जर! देखो, ये नेवला और उल्लू दोनों ही पापपूर्ण इरादे से यहाँ ठहरे हुए हैं। वे मेरी घात में बैठे हैं। जब तक वे मुझ पर आक्रमण नहीं करते, मैं ठीक हूँ।' 54.
 
‘Marjar! Look, this mongoose and the owl are both staying here with sinful intentions. They are waiting in ambush for me. As long as they do not attack me, I am fine. 54.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)