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mahabharat 12.138.53: बहुत सोच-विचार के बाद मैंने तुम्हारे और मेरे लिए एक उपाय खोज निकाला है जो हम दोनों के लिए समान रूप से लाभदायक होगा ॥ 53॥   |   mahabharat अध्याय 12.138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान  »  श्लोक 53
 
 
श्लोक  12.138.53 
मयाप्युपायो दृष्टोऽयं विचार्य मतिमात्मन:।
आत्मार्थं च त्वदर्थं च श्रेय: साधारणं हि नौ॥ ५३॥
 
 
अनुवाद
बहुत सोच-विचार के बाद मैंने तुम्हारे और मेरे लिए एक उपाय खोज निकाला है जो हम दोनों के लिए समान रूप से लाभदायक होगा ॥ 53॥
 
'After a lot of thought and deliberation, I have found a solution for you and me which will be equally beneficial for both of us.॥ 53॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)