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mahabharat 12.138.52: एक उपाय है जिससे आप इस समस्या से छुटकारा पा सकते हैं और मैं भी कल्याण का भागी बन सकता हूँ। यद्यपि वह उपाय मुझे कठिन लगता है।' 52.   |   mahabharat अध्याय 12.138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान  »  श्लोक 52
 
 
श्लोक  12.138.52 
अस्ति कश्चिदुपायोऽत्र दुष्कर: प्रतिभाति मे।
येन शक्यस्त्वया मोक्ष: प्राप्तुं श्रेयस्तथा मया॥ ५२॥
 
 
अनुवाद
एक उपाय है जिससे आप इस समस्या से छुटकारा पा सकते हैं और मैं भी कल्याण का भागी बन सकता हूँ। यद्यपि वह उपाय मुझे कठिन लगता है।' 52.
 
‘There is a way by which you can get rid of this problem and I too can be a part of the welfare. Although that way seems difficult to me. 52.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)