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श्री महाभारत
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पर्व 12: शान्ति पर्व
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अध्याय 138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान
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श्लोक 51
श्लोक
12.138.51
न ते सौम्य भयं कार्यं जीविष्यसि यथासुखम्।
अहं त्वामुद्धरिष्यामि यदि मां न जिघांससि॥ ५१॥
अनुवाद
सौम्य! तुम्हें डरना नहीं चाहिए। तुम सुख से रह सकोगे। यदि तुम मुझे मारने की इच्छा त्याग दोगे, तो मैं तुम्हें इस संकट से बचा लूँगा। 51.
'Soumya! You should not be afraid. You will be able to live happily. If you give up the desire to kill me, I will save you from this danger. 51.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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