Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.138.5: जब पहले से सताए हुए डाकू आदि शत्रु राजा को संकट में देखते हैं, तब उनमें से बहुत से मिलकर असहाय राजा को उखाड़ फेंकने का प्रयत्न करते हैं ॥5॥ | mahabharat अध्याय 12.138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
विषमस्थं हि राजानं शत्रव: परिपन्थिन:।
बहवोऽप्येकमुद्धर्तुं यतन्ते पूर्वतापिता:॥ ५॥
अनुवाद
जब पहले से सताए हुए डाकू आदि शत्रु राजा को संकट में देखते हैं, तब उनमें से बहुत से मिलकर असहाय राजा को उखाड़ फेंकने का प्रयत्न करते हैं ॥5॥
When the previously harassed enemies like robbers etc. see the king in trouble, then many of them join together and try to overthrow the helpless king. ॥ 5॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥