Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.138.47-48h: अच्छा, अब मैं उसे आत्मरक्षा का उपाय बताता हूँ। सम्भव है कि इस समय मेरी संगति से यह शत्रु विद्वान् हो जाए - उसे अपने विवेक का प्रयोग करना चाहिए।॥47 1/2॥ | mahabharat अध्याय 12.138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अच्छा, अब मैं उसे आत्मरक्षा का उपाय बताता हूँ। सम्भव है कि इस समय मेरी संगति से यह शत्रु विद्वान् हो जाए - उसे अपने विवेक का प्रयोग करना चाहिए।॥47 1/2॥
'Okay, now I am telling him a method for self-defense. It is possible that this enemy may become learned by my company at this time - he should use his discretion.'॥ 47 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥