श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  12.138.43 
नीतिशास्त्रं समाश्रित्य हितमस्योपवर्णये।
येनेमं शत्रुसंघातं मतिपूर्वेण वञ्चये॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
आज मैं नीति का आश्रय लेकर उसे उसका लाभ बताऊँगा; जिससे बुद्धि के द्वारा मैं इस शत्रु समूह को धोखा देकर बच जाऊँगा॥ 43॥
 
‘Today, I shall take the help of ethics and explain its benefits to him; by which, with the help of wisdom, I shall deceive this enemy group and be saved.॥ 43॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)