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श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  12.138.41 
न त्वन्यामिह मार्जाराद् गतिं पश्यामि साम्प्रतम्।
विषमस्थो ह्ययं शत्रु: कृत्यं चास्य महन्मया॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
इस समय मुझे इस बिल्ली की सहायता के अलावा और कोई उपाय नहीं सूझ रहा। यद्यपि यह मेरा कट्टर शत्रु है, फिर भी इस समय यह स्वयं बड़ी मुसीबत में है। मैं इस महान कार्य में इसकी सहायता कर सकता हूँ।
 
‘At this time I do not see any other way for myself except taking the help of this cat. Although he is my staunch enemy, he himself is in great trouble at this time. I can help him in this great task.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)