श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  12.138.4 
शत्रुभिर्बहुभिर्ग्रस्तो यथा वर्तेत पार्थिव:।
एतदिच्छाम्यहं श्रोतुं सर्वमेव यथाविधि॥ ४॥
 
 
अनुवाद
जब अनेक शत्रुओं द्वारा आक्रमण किया जाए, तब राजा को कैसा आचरण करना चाहिए? मैं यह सब विस्तारपूर्वक सुनना चाहता हूँ ॥4॥
 
How should a king behave when he is attacked by many enemies? I wish to hear all this in detail. ॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)