श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान  »  श्लोक 39-40
 
 
श्लोक  12.138.39-40 
न हि बुद्धॺान्वित: प्राज्ञो नीतिशास्त्रविशारद:॥ ३९॥
निमज्जत्यापदं प्राप्य महतीं दारुणामपि॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
नीतिज्ञ विद्वान् पुरुष महान् एवं भयंकर विपत्ति आने पर भी उसमें नहीं डूबता, अपितु उससे बचने का प्रयत्न करता है॥ 39-40॥
 
‘A wise, learned man who is well versed in ethics does not drown in a great and dreadful calamity even when it occurs; rather, he tries to escape from it.॥ 39-40॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)