श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान  »  श्लोक 38-39h
 
 
श्लोक  12.138.38-39h 
न त्वेवास्मद्विध: प्राज्ञ: सम्मोहं गन्तुमर्हति॥ ३८॥
करिष्ये जीविते यत्नं यावद् युक्त्या प्रतिग्रहात्।
 
 
अनुवाद
परन्तु मुझ जैसे बुद्धिमान व्यक्ति को घबराना नहीं चाहिए। इसलिए, जहाँ तक तर्क की अनुमति है, मैं परस्पर सहायता करके अपनी जान बचाने का प्रयत्न करूँगा।'
 
‘However, a wise person like me should not panic. Therefore, as far as logic allows, I will try to save my life by exchanging mutual help. 38 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)