Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.138.36-37h: संकटग्रस्त और विनाश के निकट पहुँचे हुए प्राणियों को भी अपने प्राणों की रक्षा करनी चाहिए। आज चारों ओर से प्राणों का संकट है; इसलिए मुझ पर यह बहुत बड़ी विपत्ति आ पड़ी है॥ 36 1/2॥ | mahabharat अध्याय 12.138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
आपद्विनाशभूयिष्ठं गतै: कार्यं हि जीवितम्॥ ३६॥
समन्तात् संशयात् सैषा तस्मादापदुपस्थिता।
अनुवाद
संकटग्रस्त और विनाश के निकट पहुँचे हुए प्राणियों को भी अपने प्राणों की रक्षा करनी चाहिए। आज चारों ओर से प्राणों का संकट है; इसलिए मुझ पर यह बहुत बड़ी विपत्ति आ पड़ी है॥ 36 1/2॥
‘Even beings who are in trouble and are on the verge of destruction must try to save their lives. Today, there is a threat to life from all sides; hence, this is a very big problem that has befallen me.॥ 36 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥