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mahabharat 12.138.35-36h: इस प्रकार उसका मार्ग सब ओर से अवरुद्ध हो गया। उसे सर्वत्र भय ही भय दिखाई देने लगा। उस भय से वह व्याकुल हो गया। इसके बाद वह पुनः अपनी श्रेष्ठ बुद्धि का आश्रय लेकर विचार करने लगा-॥35 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 12.138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान  »  श्लोक 35-36h
 
 
श्लोक  12.138.35-36h 
स तथा सर्वतो रुद्ध: सर्वत्र भयदर्शन:॥ ३५॥
अभवद् भयसंतप्तश्चक्रे च परमां मतिम्।
 
 
अनुवाद
इस प्रकार उसका मार्ग सब ओर से अवरुद्ध हो गया। उसे सर्वत्र भय ही भय दिखाई देने लगा। उस भय से वह व्याकुल हो गया। इसके बाद वह पुनः अपनी श्रेष्ठ बुद्धि का आश्रय लेकर विचार करने लगा-॥35 1/2॥
 
In this way his path was blocked from all sides. He saw fear everywhere. He became distressed due to that fear. After this he again started thinking taking shelter of his superior intellect-॥ 35 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)