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mahabharat 12.138.34-35h: ‘ओह! इस दुःखदायी विपत्ति में मृत्यु निकट खड़ी है। सब ओर से भय उत्पन्न हो गया है। ऐसी स्थिति में अपना कल्याण चाहने वाले मनुष्य को क्या उपाय अपनाना चाहिए?’॥34 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 12.138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान  »  श्लोक 34-35h
 
 
श्लोक  12.138.34-35h 
आपद्यस्यां सुकष्टायां मरणे प्रत्युपस्थिते॥ ३४॥
समन्ताद् भय उत्पन्ने कथं कार्यं हितैषिणा।
 
 
अनुवाद
‘ओह! इस दुःखदायी विपत्ति में मृत्यु निकट खड़ी है। सब ओर से भय उत्पन्न हो गया है। ऐसी स्थिति में अपना कल्याण चाहने वाले मनुष्य को क्या उपाय अपनाना चाहिए?’॥34 1/2॥
 
‘Oh! In this painful calamity, death is standing near. Fear has arisen from all sides. In such a situation, what solution should a person who wants his own welfare adopt?’॥ 34 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)