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mahabharat 12.138.33-34h: चूहा, जो उल्लू और तीतर दोनों का निशाना बन चुका था, बहुत डर गया। अब उसे इस तरह चिंता होने लगी -   |   mahabharat अध्याय 12.138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान  »  श्लोक 33-34h
 
 
श्लोक  12.138.33-34h 
गतस्य विषयं तत्र नकुलोलूकयोस्तथा॥ ३३॥
अथास्यासीदियं चिन्ता तत् प्राप्य सुमहद् भयम्।
 
 
अनुवाद
चूहा, जो उल्लू और तीतर दोनों का निशाना बन चुका था, बहुत डर गया। अब उसे इस तरह चिंता होने लगी -
 
The mouse, who had become the target of both the owl and the pheasant, was very afraid. Now he started worrying like this -
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)