Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.138.31: वह उसी जाति का एक नेवला था। उसकी आँखें तांबे जैसी थीं। वह फुर्तीला नेवला हरिण नाम से जाना जाता था और उसी चूहे की गंध पाकर बड़ी जल्दी में वहाँ पहुँचा था। 31. | mahabharat अध्याय 12.138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
नकुलं हरिणं नाम चपलं ताम्रलोचनम्।
तेन मूषिकगन्धेन त्वरमाणमुपागतम्॥ ३१॥
अनुवाद
वह उसी जाति का एक नेवला था। उसकी आँखें तांबे जैसी थीं। वह फुर्तीला नेवला हरिण नाम से जाना जाता था और उसी चूहे की गंध पाकर बड़ी जल्दी में वहाँ पहुँचा था। 31.
He was a mongoose of the same caste. His eyes looked like copper. That nimble mongoose was known as Harin and had reached there in great haste after getting the smell of the same rat. 31.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥