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mahabharat 12.138.30: तभी उसने एक और भयंकर शत्रु को उधर आते देखा, जो सरकण्डे के फूल के समान भूरे रंग का था। वह भूमि में गड्ढा बनाकर उसके अन्दर सोता था।   |   mahabharat अध्याय 12.138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.138.30 
अपश्यदपरं घोरमात्मन: शत्रुमागतम्।
शरप्रसूनसङ्काशं महीविवरशायिनम्॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
तभी उसने एक और भयंकर शत्रु को उधर आते देखा, जो सरकण्डे के फूल के समान भूरे रंग का था। वह भूमि में गड्ढा बनाकर उसके अन्दर सोता था।
 
Then he saw another fierce enemy coming there, who was brown in colour like the flower of a reed. He used to make a hole in the ground and sleep inside it. 30.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)