श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  12.138.29 
तस्योपरि सपत्नस्य बद्धस्य मनसा हसन्।
आमिषे तु प्रसक्त: स कदाचिदवलोकयन्॥ २९॥
 
 
अनुवाद
जाल में मांस खाते हुए चूहा मन ही मन अपने दुश्मन पर हँस रहा था। इसी बीच उसकी नज़र दूसरी तरफ़ घूम गई। 29.
 
The mouse, busy eating the meat on the net, was laughing at its enemy inwardly. In the meanwhile its sight turned in another direction. 29.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)