Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.138.25: प्रतिदिन रात्रि में नाना प्रकार के प्राणी उस जाल में फँस जाते थे (वह उन्हें निकालने के लिए प्रातःकाल आता था)। एक दिन उसकी असावधानी से उक्त बिल्ली भी उस जाल में फँस गई॥ 25॥   |   mahabharat अध्याय 12.138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  12.138.25 
तत्र स्म नित्यं बध्यन्ते नक्तं बहुविधा मृगा:।
कदाचिदत्र मार्जारस्त्वप्रमत्तो व्यबध्यत॥ २५॥
 
 
अनुवाद
प्रतिदिन रात्रि में नाना प्रकार के प्राणी उस जाल में फँस जाते थे (वह उन्हें निकालने के लिए प्रातःकाल आता था)। एक दिन उसकी असावधानी से उक्त बिल्ली भी उस जाल में फँस गई॥ 25॥
 
Every day at night various kinds of animals got trapped in that net (he used to come in the morning to get them). One day due to his carelessness the aforementioned cat also got trapped in that net.॥ 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)