भरतनन्दन! नरेश्वर! चूहे और बिल्ली का यह सुन्दर उपाख्यान संधि और विग्रह का ज्ञान तथा विशेष बुद्धि उत्पन्न करने वाला है। भूस्वामी को चाहिए कि इसे सदैव ध्यान में रखे और शत्रु के साथ भी उचित व्यवहार करे। 221॥
Bharatnandan! Nareshwar! This beautiful anecdote about the rat and the cat gives rise to the knowledge of Sandhi and Vigraha and special intelligence. The landowner should always keep this in mind and behave appropriately with the enemy. 221॥
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि आपद्धर्मपर्वणि मार्जारमूषिकसंवादे अष्टात्रिंशदधिकशततमोऽध्याय:॥ १३८॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत आपद्धर्मपर्वमें चूहे और बिलावका संवादविषयक एक सौ अड़तीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १३८॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥