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mahabharat 12.138.219-220: हे राजन! ब्राह्मणों का उचित सम्मान करने से तुम्हें धीरे-धीरे राज्य, परम कल्याण, यश, कीर्ति और वंश को आगे बढ़ाने वाली संतान - सब कुछ प्राप्त हो जाएगा।   |   mahabharat अध्याय 12.138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान  »  श्लोक 219-220
 
 
श्लोक  12.138.219-220 
राज्यं श्रेय: परं राजन् यश: कीर्तिं च लप्स्यसे॥ २१९॥
कुलस्य संततिं चैव यथान्यायं यथाक्रमम्॥ २२०॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! ब्राह्मणों का उचित सम्मान करने से तुम्हें धीरे-धीरे राज्य, परम कल्याण, यश, कीर्ति और वंश को आगे बढ़ाने वाली संतान - सब कुछ प्राप्त हो जाएगा।
 
O King! By properly honouring the Brahmins you will gradually obtain everything - kingdom, supreme welfare, fame, glory and progeny to carry forward the lineage.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)