Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.138.210-211h: राजा! जो मनुष्य भय के आने से पहले ही उसके प्रति शंकालु हो जाता है, उसे प्रायः किसी भय का सामना नहीं करना पड़ता; किन्तु जो दूसरों पर बिना किसी शंका के विश्वास करता है, उसे अचानक ही महान भय का सामना करना पड़ता है। | mahabharat अध्याय 12.138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न भयं विद्यते राजन् भीतस्यानागते भये॥ २१०॥
अभीतस्य च विश्रम्भात् सुमहज्जायते भयम्।
अनुवाद
राजा! जो मनुष्य भय के आने से पहले ही उसके प्रति शंकालु हो जाता है, उसे प्रायः किसी भय का सामना नहीं करना पड़ता; किन्तु जो दूसरों पर बिना किसी शंका के विश्वास करता है, उसे अचानक ही महान भय का सामना करना पड़ता है।
King! A man who is suspicious of fear before it comes, usually does not face any fear; but one who trusts others without any doubt, has to suddenly face a great fear. 210 1/2.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥