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mahabharat 12.138.207-208h: हे मनुष्यों के स्वामी! समयानुसार शत्रु के साथ संधि करना और मित्र के साथ युद्ध करना उचित है। संधि के तत्त्व को जानने वाले विद्वान पुरुष सदैव यही कहते हैं।   |   mahabharat अध्याय 12.138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान  »  श्लोक 207-208h
 
 
श्लोक  12.138.207-208h 
कालेन रिपुणा संधि: काले मित्रेण विग्रह:॥ २०७॥
कार्य इत्येव संधिज्ञा: प्राहुर्नित्यं नराधिप।
 
 
अनुवाद
हे मनुष्यों के स्वामी! समयानुसार शत्रु के साथ संधि करना और मित्र के साथ युद्ध करना उचित है। संधि के तत्त्व को जानने वाले विद्वान पुरुष सदैव यही कहते हैं।
 
O lord of men! According to the time it is appropriate to make a treaty with the enemy and to wage war with a friend. Learned men who know the essence of treaty always say this. 207 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)