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mahabharat 12.138.206-207h: इसलिए मनुष्य को चाहिए कि वह निडर रहे, भले ही वह भयभीत हो, और विश्वासी रहे, भले ही वह किसी पर विश्वास न करता हो। उसे कभी भी बिना सोचे-समझे नहीं चलना चाहिए। अगर वह ऐसा करेगा, तो उसका विनाश हो जाएगा। 206 1/2   |   mahabharat अध्याय 12.138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान  »  श्लोक 206-207h
 
 
श्लोक  12.138.206-207h 
तस्मादभीतवद् भीतो विश्वस्तवदविश्वसन्॥ २०६॥
न ह्यप्रमत्तश्चलति चलितो वा विनश्यति।
 
 
अनुवाद
इसलिए मनुष्य को चाहिए कि वह निडर रहे, भले ही वह भयभीत हो, और विश्वासी रहे, भले ही वह किसी पर विश्वास न करता हो। उसे कभी भी बिना सोचे-समझे नहीं चलना चाहिए। अगर वह ऐसा करेगा, तो उसका विनाश हो जाएगा। 206 1/2
 
Therefore, a man should behave like a fearless person even if he is afraid and like a trusting person even if he does not trust anyone. He should never walk without caution. If he does, he will be destroyed. 206 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)