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mahabharat 12.138.205-206h: ऐसे अवसरों पर बुद्धिमान व्यक्ति अपनी सद्बुद्धि का प्रयोग करके संधि करके अपने शत्रु को परास्त कर देता है। इसी प्रकार यदि विद्वान व्यक्ति असावधान हो, तो वह अन्य बुद्धिमान व्यक्तियों से पराजित हो जाता है।   |   mahabharat अध्याय 12.138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान  »  श्लोक 205-206h
 
 
श्लोक  12.138.205-206h 
तत्र प्राज्ञोऽभिसंधत्ते सम्यग् बुद्धिसमाश्रयात्॥ २०५॥
अभिसंधीयते प्राज्ञ: प्रमादादपि वा बुधै:।
 
 
अनुवाद
ऐसे अवसरों पर बुद्धिमान व्यक्ति अपनी सद्बुद्धि का प्रयोग करके संधि करके अपने शत्रु को परास्त कर देता है। इसी प्रकार यदि विद्वान व्यक्ति असावधान हो, तो वह अन्य बुद्धिमान व्यक्तियों से पराजित हो जाता है।
 
On such occasions, a wise man defeats his enemy by making a treaty using his good intellect. Similarly, if a learned man is careless, he is defeated by other wise men. 205 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)