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mahabharat 12.138.204-205h: यद्यपि चूहा और बिल्ली एक-दूसरे के शत्रु थे, फिर भी संकट के समय उनमें एक-दूसरे के प्रति अगाध प्रेम उत्पन्न हो गया। उन्होंने परस्पर संधि करने का विचार किया।   |   mahabharat अध्याय 12.138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान  »  श्लोक 204-205h
 
 
श्लोक  12.138.204-205h 
अन्योन्यकृतवैरौ तु चक्रतु: प्रीतिमुत्तमाम्॥ २०४॥
अन्योन्यमभिसंधातुं सम्बभूव तयोर्मति:।
 
 
अनुवाद
यद्यपि चूहा और बिल्ली एक-दूसरे के शत्रु थे, फिर भी संकट के समय उनमें एक-दूसरे के प्रति अगाध प्रेम उत्पन्न हो गया। उन्होंने परस्पर संधि करने का विचार किया।
 
Though the rat and the cat were enemies of each other, yet in the time of crisis they developed great love for each other. They thought of entering into a mutual treaty. 204 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)