श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान  »  श्लोक 203-204h
 
 
श्लोक  12.138.203-204h 
इत्येवं क्षत्रधर्मस्य मया मार्गो निदर्शित:॥ २०३॥
विस्तरेण महाराज संक्षेपमपि मे शृणु।
 
 
अनुवाद
महाराज! इस उदाहरण के द्वारा मैंने आपको क्षत्रिय धर्म का मार्ग विस्तार से बताया है। अब आप मेरी बात संक्षेप में सुनें।
 
Maharaj! Through this example I have shown you the path of Kshatriya Dharma in detail. Now listen to me briefly. 203 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)