श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान  »  श्लोक 201-203h
 
 
श्लोक  12.138.201-203h 
एवं प्रज्ञावता बुद्धॺा दुर्बलेन महाबला:॥ २०१॥
एकेन बहवोऽमित्रा: पलितेनाभिसंधिता:।
अरिणापि समर्थेन संधिं कुर्वीत पण्डित:॥ २०२॥
मूषिकश्च बिडालश्च मुक्तावन्योन्यसंश्रयात्।
 
 
अनुवाद
इस प्रकार बुद्धिमान पलित चूहे ने दुर्बल और अकेला होते हुए भी अपनी बुद्धि के बल से अनेक बलवान शत्रुओं को परास्त कर दिया; अतः संकट के समय बुद्धिमान मनुष्य को बलवान शत्रु से भी संधि कर लेनी चाहिए। देखो, चूहे और बिल्ली दोनों ने एक-दूसरे का आश्रय लेकर संकट से मुक्ति पा ली थी।
 
In this way, the wise Palit mouse, despite being weak and alone, defeated many strong enemies by the power of his intelligence; hence, in times of trouble, a wise man should make peace with even a strong enemy. See, both the mouse and the cat had got rid of the trouble by taking shelter of each other. 201-202 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)