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श्री महाभारत
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पर्व 12: शान्ति पर्व
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अध्याय 138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान
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श्लोक 200-201h
श्लोक
12.138.200-201h
तत: शास्त्रार्थतत्त्वज्ञो बुद्धिसामर्थ्यमात्मन:॥ २००॥
विश्राव्य पलित: प्राज्ञो बिलमन्यज्जगाम ह।
अनुवाद
तत्पश्चात् नीति का मर्म और सार जानने वाले बुद्धिमान पालित अपनी बुद्धिशक्ति का परिचय देते हुए दूसरे छिद्र में चले गए ॥200 1/2॥
Thereafter, the intelligent Palit, who knew the meaning and essence of ethics, demonstrated his intellectual power and went to another hole. 200 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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