श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  12.138.20 
स्कन्धवान् मेघसङ्काश: शीतच्छायो मनोरम:।
अरण्यमभितो जात: स तु व्यालमृगाकुल:॥ २०॥
 
 
अनुवाद
अपनी घनी शाखाओं और हरियाली के कारण वह बादल जैसा दिखता था। उसकी छाया ठंडी थी। जंगल के पास होने के कारण यह सुंदर पेड़ कई साँपों और जानवरों का आश्रय स्थल था।
 
It looked like a cloud because of its thick branches and greenery. Its shade was cool. This beautiful tree was a shelter for many snakes and animals because it was near the forest.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)