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mahabharat 12.138.198-199h: बिल्ली! मुझे तुम जैसे लोगों से सदैव अपनी रक्षा करनी चाहिए और तुम्हें भी अपने स्वाभाविक शत्रु चाण्डाल से अपनी रक्षा करनी चाहिए॥198 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 12.138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान  »  श्लोक 198-199h
 
 
श्लोक  12.138.198-199h 
त्वद्विधेभ्यो मया ह्यात्मा रक्ष्यो मार्जार सर्वदा॥ १९८॥
रक्ष त्वमपि चात्मानं चाण्डालाज्जातिकिल्बिषात्।
 
 
अनुवाद
बिल्ली! मुझे तुम जैसे लोगों से सदैव अपनी रक्षा करनी चाहिए और तुम्हें भी अपने स्वाभाविक शत्रु चाण्डाल से अपनी रक्षा करनी चाहिए॥198 1/2॥
 
'Cat! I must always protect myself from people like you and you too must protect yourself from your natural enemy, the Chandala.'॥ 198 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)