vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 12: शान्ति पर्व
»
अध्याय 138: शत्रुओंसे घिरे हुए राजाके कर्तव्यके विषयमें बिडाल और चूहेका आख्यान
»
श्लोक 196-197h
श्लोक
12.138.196-197h
संक्षेपो नीतिशास्त्राणामविश्वास: परो मत:॥ १९६॥
नृषु तस्मादविश्वास: पुष्कलं हितमात्मन:।
अनुवाद
संक्षेप में, नैतिकता का सार यह है कि किसी पर भी भरोसा न करना ही सर्वोत्तम है; इसलिए, दूसरों पर भरोसा न करना ही हमारे सर्वोत्तम हित में है।
‘In short, the essence of ethics is that it is best not to trust anyone; therefore, it is in our best interest not to trust others.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×